गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

तुम्हारी जय होवै ..

देशी कृपानिधान तुम्हारी जय होवै
निकल रही है जान, तुम्हारी जय होवै

जेड श्रेणी जेड प्लस श्रेणी वाले भगवन
पत्थर खाय जवान तुम्हारी जय होवै

अन्न उगाने वाला तिल तिल मरता है
पीता मूत किसान तुम्हारी जय होवै

योग भोग मदिरा मोटर, वैभव वालों
खा लेना इंसान तुम्हारी जय होवै

ये सारे जयकारे गाली हैं, जब तक
दुखी किसान जवान तुम्हारी जय होवै

हे जनसेवक हे दुखभंजन हे अवतारी
कहाँ आँख और कान तुम्हारी जय होवै !

- आनंद

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

तन्हा क़दम बढ़ाना आया

तन्हा क़दम बढ़ाना आया
समझो दर्द भगाना आया

जिसने खुद ही राह बनायी
उसके साथ ज़माना आया

तुम क्यों इतनी दूर खड़े थे
जब जब ठौर ठिकाना आया

उस दिल पर क्या गुजरी होगी
जिसको धोखा खाना आया

कुछ तो ख़्वाब यार ने तोड़े
खुद कुछ भरम मिटाना आया

बरसों खुद से लड़ा मुक़दमा
तब जाकर मुस्काना आया

इक पूरे जीवन के बदले
दो पल का हर्ज़ाना आया

हमने ही ये आग चुनी है
तुमको कहाँ जलाना आया

जीवन भर का हासिल ये है
बस मन को समझाना आया

ये 'आनंद' उसी का हक़ है
जिसको भाव लगाना आया

- आनंद

मंगलवार, 28 मार्च 2017

झूठ या सच राम जानें...

झूठ या सच राम जानें, मुस्कराना आ गया
ज़िन्दगी आखिर तेरा हर ग़म उठाना आ गया

कौन हो-हल्ला करे किसको पुकारे साथ को
अब मुझे तनहाइयों से घर सजाना आ गया

इसमें रत्ती भर हमारे यार की गलती नहीं
अपनी उम्मीदें ही बैरी थीं, मिटाना आ गया

आज भी आँखें छलक आयीं किसी के नाम से
मैने समझा था मुझे सबकुछ भुलाना आ गया

शोखि़यों के ज़िक्र से अब भी बहक सकता हूँ मैं
फ़र्क इतना है बहक कर होश आना आ गया

आजकल सुर्खाब के पर लग गये हैं देश को
तन्त्र को अब लोक की भेड़ें चराना आ गया

शायरों में भी सियासत की कदर बढ़ने लगी
अब मुखौटे शायरी को भी लगाना आ गया

प्यार के दो बोल सुनने को तरसता उम्र भर
जब चला 'आनंद' मातम को जमाना आ गया

- आनंद

बुधवार, 22 मार्च 2017

तुम्हारा साथ

'और तुम्हारा साथ...? '

मैं प्रतीक्षा को समय से मापता हूँ
और समय को जीवन से
जीवन को मापता हूँ तुम्हारे साथ से
और तुम्हारा साथ ... ?
छोड़ो
मैं फिर से प्रतीक्षा पर लौटता हूँ  !

मैं दुख को देह से मापता हूँ
और देह को आयु से
आयु को मापता हूँ तुम्हारे साथ से
और  तुम्हारा साथ...?
छोड़ो
मैं फिर से दुख पर लौटता हूँ

मैं मृत्यु को शान्ति से मापता हूँ
और शान्ति को प्रेम से
प्रेम को मापता हूँ  तुम्हारे साथ से
और तुम्हारा साथ...  ?
छोड़ो
मैं फिर से मृत्यु पर लौटता हूँ !

- आनंद

शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

अपने समय की चाल से आगे...

अपने समय की चाल से आगे निकल गया
इन्सान जरूरत की मशीनों में ढल गया

हम इंतज़ार ओढ़ के सोये थे ठाठ से
भगदड़ में कोई ख़्वाब हमारे कुचल गया

बाहर से ठीक ठाक है, अंदर लहूलुहान
ये देश मेरा गुड़ भरा हंसिया निगल गया

आता कहाँ से ज़िन्दगी के खेल का मज़ा
जब जब मैं जीतने लगा पाला बदल गया

दोनों ने ख़्वाब वस्ल के देखे ये कम है क्या
अब क्या करें जो वस्ल का मौसम निकल गया

अपने ही भरमजाल में उलझी थी ज़िन्दगी
फ़ुर्सत मिली तो उम्र का सूरज ही ढल गया

ये क्या कि बात बात में आँसू छलक पड़ें
'आनंद' तेरा दर्द तमाशा निकल गया

- आनंद