बुधवार, 22 मार्च 2017

तुम्हारा साथ

'और तुम्हारा साथ...? '

मैं प्रतीक्षा को समय से मापता हूँ
और समय को जीवन से
जीवन को मापता हूँ तुम्हारे साथ से
और तुम्हारा साथ ... ?
छोड़ो
मैं फिर से प्रतीक्षा पर लौटता हूँ  !

मैं दुख को देह से मापता हूँ
और देह को आयु से
आयु को मापता हूँ तुम्हारे साथ से
और  तुम्हारा साथ...?
छोड़ो
मैं फिर से दुख पर लौटता हूँ

मैं मृत्यु को शान्ति से मापता हूँ
और शान्ति को प्रेम से
प्रेम को मापता हूँ  तुम्हारे साथ से
और तुम्हारा साथ...  ?
छोड़ो
मैं फिर से मृत्यु पर लौटता हूँ !

- आनंद

शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

अपने समय की चाल से आगे...

अपने समय की चाल से आगे निकल गया
इन्सान जरूरत की मशीनों में ढल गया

हम इंतज़ार ओढ़ के सोये थे ठाठ से
भगदड़ में कोई ख़्वाब हमारे कुचल गया

बाहर से ठीक ठाक है, अंदर लहूलुहान
ये देश मेरा गुड़ भरा हंसिया निगल गया

आता कहाँ से ज़िन्दगी के खेल का मज़ा
जब जब मैं जीतने लगा पाला बदल गया

दोनों ने ख़्वाब वस्ल के देखे ये कम है क्या
अब क्या करें जो वस्ल का मौसम निकल गया

अपने ही भरमजाल में उलझी थी ज़िन्दगी
फ़ुर्सत मिली तो उम्र का सूरज ही ढल गया

ये क्या कि बात बात में आँसू छलक पड़ें
'आनंद' तेरा दर्द तमाशा निकल गया

- आनंद

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

विरही बसंत ...

उन तक भी अब जाएगा इस दिल का संवाद
ऋतु बासंती कर रही पीड़ा का अनुवाद

पीली सरसों की लहक, चहक पखेरू केरि
लिये उदासी ह्रदय में, रहीं उन्हें ही टेरि

'वैलेंटाइन' संत जी, उधर बजाएं ढोल
इत फागुन बैरी हुआ रहि रहि करे ठिठोल

कब तक रखें हौसला कैसे रखें आस
नन्हें नन्हें ख़्वाब थे जिन्हें मिला वनवास

झूठ बोलते हैं सभी, दिल से दिल की रीत
पत्थर दिल कैसे हुए मेरे मन के मीत

उलटे हैं आनंद सब जीवन के व्याख्यान
जिसको देखा तक नहीं उसको दे दी जान

 - आनंद





शनिवार, 28 जनवरी 2017

नहीं चहिये भाई..

घर के किस्से आम, नहीं चहिये भाई
बद अच्छा, बदनाम, नहीं चहिये भाई

कुछ साथी बस साथ खड़े हों जीवन में
ज्यादा दुआ सलाम, नहीं चहिये भाई

शायर क्या जो मन का शाहँशाह न हो
पूँछ हिलाकर नाम नहीं चहिये भाई

औरों को दुख देकर अपना काम बने
मुझको ऐसा काम नहीं चहिये भाई

बेटी गर्भ गिराया, बेटा पाने को
उनसे सीताराम नहीं चहिये भाई

दो लफ़्जों में दिल की बातें होती हैं
ज्यादा बड़ा कलाम नहीं चहिये भाई

जीवन में आनंद , भले थोड़ा कम हो
जीवन में कोहराम नहीं चहिये भाई

- आनंद

गुरुवार, 26 जनवरी 2017

अपना दर्द किनारे रख.

जितना संभव टारे रख
अपना दर्द किनारे रख

दिखता है सो बिकता है
बाहर जीभ निकारे रख

अंदर केवल जय जय है
अपने प्रश्न दुआरे रख

अंदर अंदर भोंक छुरी
ऊपर से पुचकारे रख

अच्छा मौसम आयेगा
यूँ ही राह निहारे रख

बे परवाह न हो कुर्सी
सत्ता को ललकारे रख

दुनिया कुछ तो बदलेगी
पत्थर पे सर मारे रख

जीवन में आनंद न हो
तो भी खीस निकारे रख

- आनंद